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Showing posts with the label Religion vs Politics

इस्लाम और दुश्मनाने इस्लाम

कुर्ब-ए-कयामत एक बात तो वाजेह है जो हदीसे आप ने पढी है, उसे दज्जाली लश्कर इसाई और यहूदीयों ने भी पढी है, और उनको पुरा यकीन है अल्लाह के आखिरी नबी हजरत मुहम्मद सल्ललाहु अलैहि वसल्लम ने जो फरमा दिया वो हो के रहेगा इंशाअल्लाह 👉यहाँ क्लिक कर के पढ़े ऐतिहासिक "मस्जिद-ए-अल अक्सा" विवाद के कारण  अफगानिस्तान हदीस को ध्यान मे रखकर दज्जाली लश्कर अपनी चाले चल रही है अफगानिस्तान की अहमियत को अमेरिका अच्छे से जानता है, इसलिये बिना किसी दुनियावी मफाद के कई सालो से अफगान मे घुसा हुआ था उसको मालूम था कि उसकी सुपर पावर हुकूमत को पैरो तले रौंदने वाला लश्कर इसी इलाके से निकलेगा ! मुल्क ए शाम ( सीरिया ) और उसको ये भी पता है कि मुल्क ए शाम ( सीरिया ) की क्या अहमियत है वो अच्छी तरह से जानता हैं कि हजरत मेंहदीं का हेडक़्वार्टर गोता मे होगा  जो गोता को पुरी तरह बर्बाद करना चाहता है ! दज्जाली लश्कर सोच रहे है की हम अपनी ताकत के बदौलत सब बदल देगे ! लेकिन इंशाअल्लाह होगा वही जो हमारे प्यारे नबी हजरत मुहम्मद सल्ललाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया है ! 👉यहाँ क्लिक कर के पढ़े बाबरी मस्जिद और राम जन्मभूमि का पूरा ...

बाबरी मस्जिद और राम जन्मभूमि का पूरा प्रकरण

"सब्र का दुसरा नाम 'भारतीय मुसलमान" माननीय न्यायपालिका, क्या आपने भारतीय मुसलमानों सा कोई सब्र करने वाला देखा ? क्या आपने इनके जैसा कोई सहिष्णु समुदाय देखा ? क्या आपने इनके जैसा कोई संविधान का पालन करने वाला देखा ? क्या आपने इनके जैसा कोई न्यायालय पर विश्वास करने वाला देखा ? बाबरी मस्जिद अगर आपका जवाब है कैसे, तो सुनिए। इतिहास बताता है कि बाबरी मस्जिद वजूद के 40 साल बाद बाबर के ही पोते अकबर के कार्यकाल में गोस्वामी तुलसीदास के लिखे “राम चरित मानस” के बाद आज की अयोध्या का जन्म होता है, जहाँ बाबरी से दो किलोमीटर दूर एक क्षेत्र में महाराजा दशरथ का पूरा राजभवन भी बाबरी के सामने बनाया गया। अयोध्या के पश्चिमी छोर पर रामकोट मंदिर बनाया गया और यह अयोध्या में पूजा का प्रमुख स्थान बना , यह सभी को पता है कि रामकोट मंदिर इसलिए महत्वपूर्ण है कि यही माना गया कि यहीं पर राम का जन्म हुआ, यह अयोध्या ही नहीं अयोध्या आने वाला बच्चा बच्चा जानता है। राम तथा सीता का निज भवन जिसे कनक भवन के नाम से जाना जाता उसका निर्माण भी बाबरी की आँखों के सामने ही हुआ , फिर इसी अयोध्या में हनुमानगढ़ी मन्दिर, ...

मुग़ल लुटेरे थे ? मुग़लों ने देश को कैसे लूटा ?

मुग़ल लुटेरे थे ? आईए देखते हैं कि इन लुटेरे मुग़लों ने देश को कैसे लूटा ?

"खिलाफते उस्मानिया" खात्मा

मेरे दिल को छूती "खिलाफते उस्मानिया" एक तहरीर

ईद-उल-अज़हा (क़ुर्बानी) के दिन "पशु प्रेम" पर उपदेश देने वाले ज़रूर पढ़े

ईद-उल-अज़हा (क़ुर्बानी) के दिन "पशु प्रेम" पर उपदेश देने वाले ज़रूर पढ़े ये बड़ी हैरान करने वाली अजीब सी बात है कि जो लोग प्रतिदिन या हफ्ते में एक बार गोश्त खाते है उन्हें भी मुसलमानों द्वारा साल में एक बार की गई कुछ जानवरों की क़ुर्बानी से ऐतराज़ होता है और उनका साल में एक बार पशु प्रेम जाग जाता है। करोड़ों जानवर रोज़ काटे जाते हैं  KFC ,  McDonalds  और  Burger   King  के द्वारा अमीरों के पेट भरने और पैसा कमाने के लिए, तब कोई पशु प्रेमी नही दिखता। सदियों से चलती आ रही परंपरा के अनुसार कितने ही हिन्दू पंडित आज भी देवी पर हज़ारों, लाखों गाय, भैसों की क़ुर्बानी देते है, तब किसी का पशु प्रेम नहीं जागता। मैं पूछता हूँ कि ईद के दिन मुस्लिम (सब नहीं, लेकिन जिसके पास करने की ताक़त है) कुर्बानी करता है, जिससे 20-25 रुपये किलो आलू, लोकी खाने वाले गरीब लोगों को फ्री में 300-400 रुपये किलो वाला बकरे का गोश्त खाने को मिल जाता है तो इसमें आपत्ति क्या है??? और क़ुर्बानी का असल उद्देश्य भी अल्लाह के हुक्म को पूरा करते हुए गरीबों की मदद करना है। क़ुरआन में अल्लाह ने कहा- "(जब क़ुर्बानी ...