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"खिलाफते उस्मानिया" खात्मा


मेरे दिल को छूती "खिलाफते उस्मानिया" एक तहरीर

जब "मुस्तफा कमाल पाशा" ने अपने यहूदी आकाओ की मदद से "खिलाफते उस्मानिया" का खात्मा किया , तो आले-उस्मान (लगभग 165 लोग) को रातो रात घरेलू लिबास में ही यूरोप भेज दिया गया ..!!

शाही परिवार (शहजादियों और राजकुमारों) ने दरयाफ्त किया कि यूरोप क्यों ..? हमें जॉर्डन , मिस्र या सीरिया , किसी भी अरब इलाके में भेज दिया जाए ..!!

लेकिन यहूदी आकाओं के आदेश स्पष्ट थे , अपने इन्तेक़ाम को ठंडा करना और आले-उस्मान को आखरी दर्जा ज़लील करना उनका मकसद था ..!!

लिहाज़ा किसी को ग्रीस जैसी यहूदी मातृभूमि तो बाकियों को यूरोप के अलग-अलग इलाको में भेजा गया , और "सुल्तान अब्दुल माजिद" और उनकी पत्नी को रातो रात फ्रांस भेजा गया , और उनकी सारी संपत्ति जब्त कर ली गई , यहां तक कि उनको घरेलू कपड़ों में खाली जेब के साथ ऐसी हालत में रुखसत किया गया कि एक पाई तक उनकी जेब मे न थी ..!!

ऐसा कहा जाता है कि सुल्तान अब्दुल माजिद के बेटे (राजकुमार) अपने चेहरे छिपा कर पेरिस की सड़कों पर भीख मांगते हुए भटकते रहे ताकि कोई उन्हें पहचान न ले ..!!

फिर जब सुल्तान का इंतेक़ाल हुआ तो चर्च ने उनकी लाश को किसी को भी सौंपने से इनकार कर दिया क्योंकि दुकानदारों का कर्ज उन पर था ..!!

आखिरकार , मुसलमानों ने सुल्तान के कर्ज को चुकाने के लिए चंदा इकट्ठा किया और उसके लाश को सीरिया भेज दिया , जहां उन्हें दफनाया गया ..!!

बीस साल बाद "अदनान मेंड्रेस" (तुर्की के पहले चुने गए प्रधानमंत्री) आले-उस्मान के बारे में पूछताछ करने वाले पहले व्यक्ति थे , वह शाही परिवार की तलाश में फ्रांस गए और उनके ठिकाने का पता लगाया ..!!
सुल्तान अब्दुल माजिद
पेरिस की अपनी यात्रा के दौरान , वो कहते रहे, "मुझे मेरे बाप का पता बताओ , मुझे मेरी माओं से मिलाओ ..!!"

आखिर जब वह पेरिस के एक छोटे से गाँव में पहुँचे , और एक कारखाने में दाखिल हुए तो वे वहां क्या देखते हैं ..?

सुल्तान अब्दुल हमीद की पत्नी , 85 वर्षीय "रानी शफीक" और उनकी बेटी , 60 वर्षीय "राजकुमारी आयशा"
उस कारखाने में बर्तन धो रही हैं ..!!

यह देखकर अदनान मेन्ड्रेस अपने आंसू न रोक सके और बिलख बिलख कर रोने लगे और उनके हाथ चूमकर कहने लगे :- "मुझे माफ़ कर दो , मुझे माफ़ कर दो ..!!"

राजकुमारी आयशा ने पूछा , "आप कौन हैं ..?

अदनान ने कहा , "मैं तुर्की का प्रधानमंत्री अदनान मेंडेस हूँ ..!!

ये सुनते ही उन्होंने कहा , "अबतक कहाँ थे ..? और खुशी के मारे बेहोश होकर गिर पड़ीं ..!!
कमाल अतातुर्क
जब अदनान मेंड्रेस तुर्की लौट आए , तो उन्होंने कमाल अतातुर्क के दोस्त और तुर्की के राष्ट्रपति "जलाल बयार" को बताया कि वह आले-उस्मान के लिए माफीनामा जारी करना चाहते हैं , और अपनी माताओं को वापस लाना चाहते हैं ..!!

राष्ट्रपति ने पहले तो इनकार किया लेकिन अदनान मेन्ड्रेस के ज़्यादा ज़ोर देने पर केवल महिलाओं को वापस लाने की अनुमति दी ..!!

अदनान मेंड्रेस स्वयं फ्रांस गए और रानी शफीक और राजकुमारी आयशा को फौरन फ्रांस से तुर्की ले आए ..!!

(लेकिन एक और माफीनामा जारी करके तुर्की में राजकुमारों को वापस लाने का श्रेय स्वर्गीय एर्बाकन को जाता है , जब वह प्रधानमंत्री थे)

फिर जब "अदनान मेंड्रेस" पर झूठा मुकदमा चलाया गया , और उनको फांसी दे दी गयी तो उनपर बाकी इल्ज़ामात के साथ साथ दो इल्ज़ाम ये भी लगाए गए थे -

1). उन्होंने 30 साल बाद तुर्की में अरबी में आज़ान और नमाज़ पढ़ने की अनुमति दी (जिसे तुर्की में कमाल अतातुर्क और उसके यहूदी आकाओ ने बंद कर दिया था ..!!)

 2). उन्होंने सरकारी खजाने से चोरी करके सुल्तान की पत्नी और बेटी पर खर्च किया , क्योंकि वह हर ईद पर रानी और राजकुमारी से मिलने जाते , उनके हाथों को चूमते और अपनी अपनी बचत से राजकुमारी आयशा और रानी शफीका 10 हज़ार लीरा पेश करते , जिससे कि उनका साल भर का खर्चा चल जाए ..!!

जब अदनान मेंड्रेस और उनके चार अन्य साथियों को 5 सितंबर को एक सैन्य अदालत द्वारा फांसी देकर शहीद किया गया , तो अगले ही दिन रानी और राजकुमारी का भी इंतेक़ाल हो गया ..!!
अदनान मेंड्रेस
दिन रात सेकुलरिज्म का ढिंढोरा पीटने वालो का ये सुलूक है इस्लाम और मुसलमानो के साथ ..!!

कोई शिष्टाचार , कोई सम्मान , कोई दया , कोई रिश्तेदारी , कोई नैतिकता , कोई मूल्य नहीं ..!!

जो लोग राष्ट्रवाद की धुन बजाते हैं , देशभक्ति के नारे लगाते हैं , जिनसे उनकी जुबान कभी नहीं थकती , उन लोगो का एकमात्र उद्देश्य इस्लामिक ब्रदर-हुड के साथ लोगों के संबंधों को अलग करना और इन पाकीज़ा रिश्तों के ताने-बाने को बिखेर कर तोड़ना मात्र है ..!!


पृथ्वी पर मौजूद शैतान के पुजारियों से कभी अनजान न रहें ..!!

और हाँ , ये कहानियाँ बच्चों को सुनाने लिए नहीं हैं , बल्कि सोतों को जगाने के लिए हैं ..!!

"उठ के अब बज़्म जहां का और ही अंदाज़ है ,
मशरिक़ व मग़रिब में तेरे दौर का आगाज़ है ..!!"


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