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इस्लाम और दुश्मनाने इस्लाम

कुर्ब-ए-कयामत


एक बात तो वाजेह है जो हदीसे आप ने पढी है, उसे दज्जाली लश्कर इसाई और यहूदीयों ने भी पढी है, और उनको पुरा यकीन है
अल्लाह के आखिरी नबी हजरत मुहम्मद सल्ललाहु अलैहि वसल्लम ने जो फरमा दिया वो हो के रहेगा इंशाअल्लाह

अफगानिस्तान
हदीस को ध्यान मे रखकर दज्जाली लश्कर अपनी चाले चल रही है
अफगानिस्तान की अहमियत को
अमेरिका अच्छे से जानता है, इसलिये बिना किसी दुनियावी मफाद के कई सालो से अफगान मे घुसा हुआ था
उसको मालूम था कि उसकी सुपर पावर हुकूमत को पैरो तले रौंदने वाला लश्कर इसी इलाके से निकलेगा !

मुल्क ए शाम ( सीरिया )
और उसको ये भी पता है कि मुल्क ए शाम ( सीरिया ) की क्या अहमियत है वो अच्छी तरह से जानता हैं कि हजरत मेंहदीं का हेडक़्वार्टर गोता मे होगा 
जो गोता को पुरी तरह बर्बाद करना चाहता है !

दज्जाली लश्कर सोच रहे है की हम अपनी ताकत के बदौलत सब बदल देगे !
लेकिन इंशाअल्लाह होगा वही जो हमारे प्यारे नबी हजरत मुहम्मद सल्ललाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया है !
पर इसका मतलब ये नहीं है कि हम यही सोचकर खुश है जो नबी ने फरमा दिया वो जब होकर ही रहेगा तो हम क्यों मेहनत करें !
उसकी जगह आराम क्यों नही करें !
याद रखें मेरी बात हजरत मेंहदीं अलै० के लश्कर में सिर्फ ईमान वाले ही होंगे बे-ईमान वाले नहीं

इसलिए आने वाली नस्लो को इल्म हासिल करने पर जोर दे !
और ऐसे इदारे कायम करे जिसमे दीन और दुनियावी की आला दर्जे की तालीम हो सके!

अल्लाह ने चाहा तो बहुत जल्द तुम्हारी जिंदगी की शाम,
मुल्क शाम मे होगी
इंशाअल्लाह
एक रोज सब ख़ाक होंगे मुसलमानों पे कहर ढाने वाले
खुदा के इंसाफ से कोई न बचा ना बचेगा

या अल्लाह दुश्मनाने इस्लाम को ईमान की सच्ची ताकत दिखा
अमीन



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