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ईद-उल-अज़हा (क़ुर्बानी) के दिन "पशु प्रेम" पर उपदेश देने वाले ज़रूर पढ़े

ईद-उल-अज़हा (क़ुर्बानी) के दिन "पशु प्रेम" पर उपदेश देने वाले ज़रूर पढ़े ये बड़ी हैरान करने वाली अजीब सी बात है कि जो लोग प्रतिदिन या हफ्ते में एक बार गोश्त खाते है उन्हें भी मुसलमानों द्वारा साल में एक बार की गई कुछ जानवरों की क़ुर्बानी से ऐतराज़ होता है और उनका साल में एक बार पशु प्रेम जाग जाता है। करोड़ों जानवर रोज़ काटे जाते हैं  KFC ,  McDonalds  और  Burger   King  के द्वारा अमीरों के पेट भरने और पैसा कमाने के लिए, तब कोई पशु प्रेमी नही दिखता। सदियों से चलती आ रही परंपरा के अनुसार कितने ही हिन्दू पंडित आज भी देवी पर हज़ारों, लाखों गाय, भैसों की क़ुर्बानी देते है, तब किसी का पशु प्रेम नहीं जागता। मैं पूछता हूँ कि ईद के दिन मुस्लिम (सब नहीं, लेकिन जिसके पास करने की ताक़त है) कुर्बानी करता है, जिससे 20-25 रुपये किलो आलू, लोकी खाने वाले गरीब लोगों को फ्री में 300-400 रुपये किलो वाला बकरे का गोश्त खाने को मिल जाता है तो इसमें आपत्ति क्या है??? और क़ुर्बानी का असल उद्देश्य भी अल्लाह के हुक्म को पूरा करते हुए गरीबों की मदद करना है। क़ुरआन में अल्लाह ने कहा- "(जब क़ुर्बानी ...